वो लम्हे वो बातें वो ठहरी सी आँखें…

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वो लम्हे वो बातें वो ठहरी सी आँखें
वो नादान पल
वो बेचैन गलिया
वो नाज़ुक सी कलियाँ
गए सब कहाँ ….

जहाँ से चले थे
तुम और हम सफ़र में
वहीं से फ़साने
शुरू हो गए थे
मगर वक़्त आया
जो हो गए जुदा हम
अधूरे अधूरे
से सपने चले …

कही आज भी है
अजब सी ख़ामोशी
वो बेचैन धड़कन
अजब सी उदासी
वो धुँधला सा सावन
वो भीगा सा आँगन
सुनाता है मुझको
कोई दास्ताँ …

 

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